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Sunday, July 7, 2013

रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा

Today being Sunday night at 10:00 as usual me and sweet hubby were Watching show on SAB TV "Wah wah kya baat hai". When Dr. Vishu Saxena he recites his poem "रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा". I fall in love with Poem and thought of worth sharing with you all. So here is the awesome Poem written by Dr. Vishnu Saxena "रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा"

रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा , एक आई लहर कुछ बचेगा नहीं 
तुमने पत्थर का दिल हमको कह  तो दिया पथरो पे लिखोगे मिटेगा नहीं -
 मै थो पतझर था क्यूँ निमंत्रण दिया,
रितु बसंती को तन पर लपेटे हुए 
आस  मन में लिए प्यास तन में लिए कब शरद आई पलों समेटे हुए 
तुमने फेरी  निगाहे अँधेरा हुआ 
रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा , एक आई लहर कुछ बचेगा नहीं 

मै तो होली माना लूँगा सुच मान लो 
तुम दिवाली बनोगे ये अभाश दो
मैं तुम्हें सौप दूँगा  तुम्हारी धरा  तुम , 
मुझे मेरे पलकों का आकाश दो 
उंगलियों पैर दुपट्टा लपेटो न तुम
यूँ करोगे थो दिल चुप रहेगा 

रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा , एक आई लहर कुछ बचेगा नहीं 

आँख खोली तो तुम रुकमनी सी दिखी 
बंद की आँख तो राधिका तुम लगे 
जब भी देखा तुमने शांत एकांत में 
मीरा बाई सी एक साधिका तुम लगी

कृष्ण की बांसुरी पर भरोसा रखो 
मन कंही भी रहे पर डुगेगा  
 रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा , एक आई लहर कुछ बचेगा नहीं 
 
DR VISHNU SAXENA

Saturday, March 3, 2012

Some Great quotations


  • If u r born poor, its not your mistake BUT if u die poor, its your mistake-
  • Born With Personality Is An Accident But Dying As A Personality Is An Achievement…!!!!!!!!
  • Ur Birth Maybe Normal. But Ur Death Should Be History!!!!!
  • Practice like a devil and play like an angel
  • Like ALL,Trust Few!!!!!
  • Old concept: "Do or die " 
    New concept: "Do before u die " 
    Latest concept: "Dont die until u do "
  • Try not to become a man of success but a man of value 

Saturday, November 5, 2011

Hum Laye Hain Toofan Se Kishti Nikal Ke

After decades of freedom struggle and innumerable sacrifices, the country finally attained freedom in 1947. In this poem the old guards pass the baton to younger generation and instruct them to carry on with great care and fortitude so that the freedom won by great efforts of several generations is sustained and the country moves on the path to progress. This poem by Pradeep moistened the eyes of a generation of Indians, especially the last stanza that exhorts the young Indians not to be complacent in the present glory but work hard to take a sky high leap of progress. The poem was also used as a song in the old hit Hindi film Jagriti - Rajiv Krishna Saxena


पासे  सभी  उलट  गए  दुश्मन  की  चाल  के  
अक्षर  सभी  पलट  गए  भारत  के  भाल  के  
मंजिल  पे  आया  मुल्क  हर  बला  को   टाल  के   
सदियों  के  बाद  फिर  उड़े  बदल  गुलाल  के   


हम  लाए  हैं   तूफ़ान  से  कश्ती  निकाल  के  
इस  देश  को  रखना  मेरे  बच्चों  संभाल  के  
तुम  ही  भविष्य  हो  मेरे  भारत  विशाल  के  
इस  देश  को  रखना  मेरे  बच्चों  संभाल  के  

देखो  कहीं  बरबाद  न  होए  ये  बगीचा  
इसको  ह्रदय  के  खून  से  बापू  ने  है    सींचा   
रखा है  ये  चिराग  शहीदों  ने  बाल  के , 
इस  देश  को रखना मेरे बच्चों संभाल के
...
दुनिया  के  दांव  पेंच  से  रखना  न  वास्ता  
मंजिल  तुम्हारी  दूर  है  लंबा  है  रास्ता  
भटका  न  दे  कोई  तुम्हें  धोखे  मेंडाल  के , 
इस  देश  को रखना मेरे बच्चों संभाल के ...

एटम  बमों  के  जोर  पे  ऐंठी  है  ये  दुनिया  
बारूद  के इक  ढेर  पे  बैठी  है  ये  दुनिया  
तुम  हर  कदम  उठाना  ज़रा  देख  भाल  के , ..
इस  देश  को रखना मेरे बच्चों संभाल के .

आराम  की  तुम  भूल  भुलय्या  में  न  भूलो  
सपनों  के  हिंडोलों    पे  मगन  होके  न  झूलो  
अब  वक़्त  आ  गया  है  मेरे  हंसते  हुए  फूलों  
उठो छलांग  मार  के  आकाश  को  छू  लो  
तुम  गाड़  दो  गगन  पे  तिरंगा उछाल  के 
इस  देश  को रखना मेरे बच्चों संभाल के

Aao Bachcho Tumhe Dikhaye Jhankee Hindustan Kee

Hello Friends,


Here is an old classic that all children in 1970s and 80s knew by heart. This was the famous song from the film Jagriti. Let us relish it once more.and remember those People


आओ  बच्चो  तुम्हे  दिखाए  झांकी  हिंदुस्तान   की 
इस मिट्टी  से  तिलक  करो  यह  धरती  है  बलिदान  की 
वन्दे मातरम ........

उत्तर में  रखवाली  करता  पर्वतराज  विरत  है 
दक्षिण में  चरणों  को  धोता  सागर  का  सम्राट  है 
जमुना  जी  के  तट  को  देखो  गंगा  का  यह  घाट  है 
बात  बात  पे  हट  हट  में  यहाँ  निराला  ठाठ   है 
देखो  यह  तस्वीरे  अपने  गौरव  की  अभिमान  की 
इस  मिट्टी  से .........

यह  है  अपना  राजपुताना  नाज  इसे  तलवारों  पे 
इसने  सारा  जीवन  कटा  बरछी  तीर  कतारों  पे 
यह  प्रताप  का   वतन  पला  है  आजादी  के   नारों  पे 
कूद  पडी  थी  यहाँ  हजारो  पद्मिनिय  अंगारों  पे 
बोल  रही  है  कण  कण  से  कुर्बानी 

राजस्थान  की  देखो  मुल्क  मराठो  का   यह  यहाँ  शिवाजी  डोला  था 
मुघलो  की  ताकत  को  जिसने  तलवारों  पे  टोला  था 
हर  पर्वत  पे  आग  लगी  थी  हर  पत्थर  एक  शोला  था 
बोली  हर  हर  महादेव  की  बच्चा  बच्चा  बोला  था 
यहाँ  शिवाजी  ने  राखी  थी  लाज  हमारी  शान  की 
इस  मिट्टी  से .........

जलियाँ  वाला  बाग  यह  देखो  यहाँ  चली  थी  गोलिया 
यह  मत  पूछो  किसने  खेली  यहाँ  खून  की  होलिया 
एक  तरफ  बंदूके  दन  दन  एक  तरफ  थी  टोलिया
मरनेवाले  बोल  रहे  थे  इन्कलाब   की  बोलिया 
यहाँ  लगा  दी  बहनों  ने  भी  बजी  अपनी  जन  की 
इस  मिट्टी  से .........

यह  देखो  बंगाल  यहाँ  का  हर  चप्पा  हरियाला  है 
यहाँ  का  बच्चा  बच्चा  अपने  देश  पे  मरनेवाला  है 
ढला  है  इसको  बिजली  ने  भूचालो  ने  पला  है 
मुट्ठी  में  तूफान  बंधा  है  और  प्राण  में  ज्वाला  है 
जन्मभूमी  है  यही  हमारे  वीर  सुभाष  महँ  की 
iss mittee se.........